9 माह 23 दिवस की अंतरिक्ष यात्रा, का मार्ग।
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Tuesday, September 23, 2014
भारत का मंगलकार्य सफल
भारत का मंगलकार्य सफल
अंतरिक्ष यात्रा 10 माह विडिओ में दर्शाया गया :-
https://www.youtube.com/watch?v=lMmyEJiOB-8&index=17&list=PLD8A212A480412E57
9 माह 23 दिवस की अंतरिक्ष यात्रा, का मार्ग।
9 माह 23 दिवस की अंतरिक्ष यात्रा, का मार्ग।
यह स्थिति पूर्णतया ‘‘इस पार या उस पार’’ वाली थी, क्योंकि समस्त कौशल के बाद भी एक तुच्छ सी भूल ऑर्बिटर को अंतरिक्ष की गहराइयों में धकेल सकती थी। यान की पूर्ण कौशल युक्त प्रक्रिया, मंगल के पीछे हुई; जैसा कि पृथ्वी से देखा गया। इसका अर्थ यह था कि मंगल परिक्रमा प्रवेश प्रज्ज्वलन में लगे, 4 मिनट के समय से लेकर प्रक्रिया के निर्धारित समय पर समापन के तीन मिनट बाद तक, पृथ्वी पर उपस्थित वैज्ञानिक दल यान की प्रगति नहीं देख पाए। ऑर्बिटर अपने उपकरणों के साथ कम से कम 6 माह तक दीर्घ वृत्ताकार पथ पर घूमता रहेगा और उपकरण एकत्र आंकड़े पृथ्वी पर भेजते रहेंगे। मंगल की कक्षा में यान को सफलतापूर्वक पहुंचाने के बाद भारत लाल ग्रह की कक्षा या सतह पर यान भेजने वाला चौथा देश बन गया है। अब तक यह उपलब्धि अमेरिका, यूरोप और रूस को मिली थी। कुल 450 करोड़़ रुपये की लागत वाले मंगल यान का उद्देश्य लाल ग्रह की सतह तथा उसके खनिज अवयवों का अध्ययन करना तथा उसके वातावरण में मीथेन गैस की खोज करना है। पृथ्वी पर जीवन के लिए मीथेन एक महत्वपूर्ण रसायन है। इस अंतरिक्ष यान का प्रक्षेपण 5 नवंबर 2013 को आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से स्वदेश निर्मित पीएसएलवी रॉकेट से किया गया था। यह 1 दिसंबर 2013 को पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण से बाहर निकल गया था।
https://www.youtube.com/watch?v=jwHBMR8C6B0&index=87&list=PLDB2CD0863341092A
भारत का एमओएम न्यूनतम लागत वाला अंतरग्रही मिशन है। नासा का मंगल यान मावेन 22 सितंबर को मंगल की कक्षा में प्रविष्ट हुआ था। भारत के एमओएम की कुल लागत मावेन की लागत का मात्र दसवां अंश है। कुल 1,350 किग्रा भार वाले अंतरिक्ष यान में पांच उपकरण लगे हैं। इन उपकरणों में एक संवेदक (सेंसर), एक रंगीन कैमरा और एक 'ताप छायांकन वर्ण-पट यंत्र' थर्मल इमैजिंग स्पेक्ट्रोमीटर शामिल है। संवेदक लाल ग्रह पर जीवन के संभावित संकेत मीथेन अर्थात मार्श गैस का पता लगाएगा। रंगीन कैमरा और 'ताप छायांकन वर्ण-पट यंत्र' लाल ग्रह की सतह का तथा उसमें उपलब्ध खनिज संपदा का अध्ययन कर आंकड़े जुटाएंगे। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने बताया कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और मावेन की टीम ने भारतीय यान के मंगल की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचने के लिए इसरो को बधाई दी है।
Antariksha Darpan. the most fascinating blog. About planet, sattelite & cosmology.
सबसे आकर्षक ब्लॉग. ग्रह, उपग्रह, और ब्रह्माण्ड विज्ञान के बारे में.
कभी ज्ञान विज्ञान से विश्वगुरु भारत की, स्वर्ण युग की उस शक्ति को
पहचान देगा; ज्ञान -विज्ञान दर्पण | आओ, मिलकर इसे बनायें; - तिलक
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Saturday, October 5, 2013
शारदीय नवरात्रि 2013
शारदीय नवरात्रि 2013
अखिल विश्व में फैले हिन्दू समाज सहित सभी देश वासियों को सपरिवार शारदीय नवरात्रों की हार्दिक बधाई व शुभकामनायें - युग दर्पण परिवार YDMS
शारदीय नवरात्रि सभी नवरात्रों में सबसे लोकप्रिय और महत्वपूर्ण नवरात्रि है। शारदीय नवरात्रि महा नवरात्रि के रूप में भी जाना जाता है। यह शारदीय नवरात्रि शरद ऋतु के मध्य सितंबर या अक्टूबर के महीने में चांद्र मास अश्विन में पड़ता है। यही कारण है कि शारदीय नवरात्रि नाम शरद ऋतु से लिया गया है। नवरात्रि के मध्य सभी नौ दिन देवी शक्ति के नौ रूपों के लिए समर्पित रहते हैं। नौ दिन का यह उत्सव दसवें दिन दशहरा या विजया दशमी; असत्य पर सत्य की, दानवों पर देव की विजय पर रावण दहन के साथ समाप्त.होता है।
महिलायें, विशेष रूप से महाराष्ट्र और गुजरात में, नवरात्रि के प्रत्येक दिन के लिए आवंटित (रंग) 9 विभिन्न रंगों के साथ स्वयं को सजाया करती हैं, जो प्रत्येक दिन एक ग्रह या नवग्रहों द्वारा शासित है और तदनुसार एक रंग प्रत्येक दिन को सौंपा जाता है। बंगाल में दुर्गा पूजा, उत्तर भारत में रामलीला, जागरण-कीर्तन और पश्चिम भारत में इस पर्व के मध्य गरबा-डांडिया की धूम रहती है।
शक्ति के रूप में दानवों का संहार करनेवाली शक्ति की युगों युगों से पूजा करने वाला यह समाज जिस मर्यादा का पालन करता है उसे व्यक्त करता है, यह गीत- हम न किसी का मुल्क चाहते हमें किसी से वैर नहीं; (साथ ही, हमारी यह भावना नपुंसकता का कारण नहीं हो, अगली पंक्ति उस पौरुष का प्रतीक है।) जो हम पर चढ़ कर आयेगा उस दुश्मन की खैर नहीं ।।
शारदीय नवरात्रि को शक्ति पूजा का पर्व कहा जाता है—इसके पीछे दो कथाएं मुख्य रूप से प्रचलित हैं। पहली है महिषासुर मर्दिनी से जुड़ी और दूसरी राम की शक्तिपूजा से। पहली कथा के अनुसार आदिशक्ति दुर्गा ने इन नौ दिनों में युद्ध करके देवताओं को महिषासुर नामक राक्षस के आतंक से मुक्त कराया था। महिषासुर नाम के राक्षस ने भगवान शिव की आराधना करके अपार शक्तियां प्राप्त कर ली थीं- उसने जल, थल और नभ पर विजय पा ली थी। ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी उसे हरा नहीं पा रहे थे। सभी देवताओं ने आदिशक्ति की आराधना की, सभी ने उन्हें अपनी-अपनी शक्तियां दीं। इसके बाद मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं और इस ब्रह्मांड को सभी कष्टों से मुक्त किया।
शारदीय नवरात्रि के महत्व के बारे में दूसरी कथा भगवान राम से जुड़ी है। त्रेता युग में राम और रावण के बीच भयानक युद्ध चल रहा था। प्राय: सभी बड़े योद्धा खोने के बाद रावण स्वयं मैदान में था। राम पूरी शक्ति लगा कर भी रावण को हरा नहीं पा रहे थे। रावण भगवान शिव का वरदान शिवभक्ति के अहंकार में डूबा था। रावण के युद्धकौशल से राम का मन भी विचलित होने लगा, वो चिंतित थे। तब श्रीराम को उनकी सेना के प्रमुख सेनापति जामवंत जी ने सुझाया—
कह हुए भानु-कुल-भूषण वहां मौन क्षण भर,
बोले विश्वस्त कण्ठ से जाम्बवान, "रघुवर,
विचलित होने का नहीं देखता मैं कारण,
हे पुरुषसिंह, तुम भी यह शक्ति करो धारण,
आराधन का दृढ़ आराधन से दो उत्तर
जामवंत ने श्रीराम से कहा यदि रावण भगवान शिव की आराधना कर इतरा रहा है तो आप शक्ति की आराधना कीजिए. शिव के वरदान की काट शक्ति के अतिरिक्त किसी और के पास नहीं. और फिर भगवान राम ने 9 दिन तक आदिशक्ति दुर्गा की घनघोर आराधना की।
अखिल विश्व में फैले हिन्दू समाज सहित सभी देश वासियों को सपरिवार शारदीय नवरात्रों की हार्दिक बधाई व शुभकामनायें - युग दर्पण परिवार YDMS
Join YDMS ;qxniZ.k सन 2001 से हिंदी साप्ताहिक राष्ट्रीय समाचार पत्र, पंजी सं RNI DelHin 11786/2001 विशेष प्रस्तुति विविध विषयों के 28+1 ब्लाग, 5 चैनल व अन्य सूत्र, की 60 से अधिक देशों में एक वैश्विक पहचान है। तिलक -संपादक युगदर्पण मीडिया समूह YDMS. 9911111611, 8743033968.
विश्वगुरु रहा वो भारत, इंडिया के पीछे कहीं खो गया |
इंडिया से भारत बनकर ही, विश्व गुरु बन सकता है; - तिलक
यह राष्ट्र जो कभी विश्वगुरु था, आज भी इसमें वह गुण,
योग्यता व क्षमता विद्यमान है | आओ मिलकर इसे बनायें; - तिलक
कभी ज्ञान विज्ञान से विश्वगुरु भारत की, स्वर्ण युग की उस शक्ति को पहचान देगा;
ज्ञान -विज्ञान दर्पण | आओ, मिलकर इसे बनायें; - तिलक
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शक्ति के रूप में दानवों का संहार करनेवाली शक्ति की युगों युगों से पूजा करने वाला यह समाज जिस मर्यादा का पालन करता है उसे व्यक्त करता है, यह गीत- हम न किसी का मुल्क चाहते हमें किसी से वैर नहीं; (साथ ही, हमारी यह भावना नपुंसकता का कारण नहीं हो, अगली पंक्ति उस पौरुष का प्रतीक है।) जो हम पर चढ़ कर आयेगा उस दुश्मन की खैर नहीं ।।

शारदीय नवरात्रि के महत्व के बारे में दूसरी कथा भगवान राम से जुड़ी है। त्रेता युग में राम और रावण के बीच भयानक युद्ध चल रहा था। प्राय: सभी बड़े योद्धा खोने के बाद रावण स्वयं मैदान में था। राम पूरी शक्ति लगा कर भी रावण को हरा नहीं पा रहे थे। रावण भगवान शिव का वरदान शिवभक्ति के अहंकार में डूबा था। रावण के युद्धकौशल से राम का मन भी विचलित होने लगा, वो चिंतित थे। तब श्रीराम को उनकी सेना के प्रमुख सेनापति जामवंत जी ने सुझाया—
कह हुए भानु-कुल-भूषण वहां मौन क्षण भर,
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विचलित होने का नहीं देखता मैं कारण,
हे पुरुषसिंह, तुम भी यह शक्ति करो धारण,
आराधन का दृढ़ आराधन से दो उत्तर
जामवंत ने श्रीराम से कहा यदि रावण भगवान शिव की आराधना कर इतरा रहा है तो आप शक्ति की आराधना कीजिए. शिव के वरदान की काट शक्ति के अतिरिक्त किसी और के पास नहीं. और फिर भगवान राम ने 9 दिन तक आदिशक्ति दुर्गा की घनघोर आराधना की।
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नकारात्मक मीडिया के सकारात्मक व्यापक विकल्प का सार्थक संकल्पJoin YDMS ;qxniZ.k सन 2001 से हिंदी साप्ताहिक राष्ट्रीय समाचार पत्र, पंजी सं RNI DelHin 11786/2001 विशेष प्रस्तुति विविध विषयों के 28+1 ब्लाग, 5 चैनल व अन्य सूत्र, की 60 से अधिक देशों में एक वैश्विक पहचान है। तिलक -संपादक युगदर्पण मीडिया समूह YDMS. 9911111611, 8743033968.
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